पर्यावरण उन सभी भौतिक रासायनिक एवं जैविक कारको की समष्टिगत इकाई है। जो किसी जीवधारी अथवा परितंत्रीय आबादी को प्रभावित करते हैं। तथा उनके रूप, जीवन और जीविता को तय करते हैं। आज पर्यावरण की चर्चा मुख्य रूप से सभी तरफ होती है क्योंकि पर्यावरण प्रदूषण आज एक बड़ी समस्या बन गई है। जीवन उदास हो रहा है इसलिए पर्यावरण के संतुलन को बनाए रखने के लिए कई योजनाओ को कई विभागों द्वारा कार्यान्वित किया जा रहा है। आज पर्यावरण एक जरूरी सवाल ही नहीं बल्कि ज्वलंत मुद्दा बना हुआ है। लेकिन आज लोगों में इस को लेकर कोई जागरूकता नहीं है। परिणाम स्वरूप पर्यावरण सुरक्षा महज एक सरकारी एजेंडा ही बनकर रह गया है। जबकि यह पूरे समाज से बहुत ही घनिष्ट संबंध रखने वाला सवाल है।

हमारे देश में पर्यावरण की कई समस्या है। वायु प्रदूषण, कचरा और प्राकृतिक पर्यावरण के प्रदूषण देश के लिए चुनौतियां हैं। हम आज देख रहे हैं कि प्रदूषण ने कहर किया हुआ है। इसकी वजह आदमी बन रहा है। सुखी जीवन जीने के लिए कलह है। इसके लिए कई शोध चल रहे हैं।पृथ्वी पर जनसंख्या बढ़ रही है। हर कोई एक अच्छा जीवन जीने के लिए प्रतिस्पर्धा कर रहा है इसलिए मानव प्रकृति के विरुद्ध काम कर रहा है। पृथ्वी पर बहुत ज्यादा वृक्ष तोडे जा रहे हैं इसलिए जंगल कम हो रहे है। इसका असर पर्यावरण पर हो रहा है और प्रदूषण समस्या बढ़ गई है। फैक्ट्री से निकलने वाला धुआ और बढ़ते वाहनों से निकलने वाला धुआं इसे वातावरण प्रदूषित हो रहा है। घटती वन जनसंख्या के कारण वर्षा कम हो रही है इसलिए भुजल स्तर गहरा गया है। वायुमंडल में ऑक्सीजन की मात्रा कम हो गई है। इसका जीवन पर प्रभाव बढ़ रहा है। कई बीमारी के प्रकोप बढ़ गया है और जीवन उदास हो गया है। शहर को प्रदूषित शहर घोषित किए जा रहे हैं। वाहन प्रतिबंधित किए जा रहे हैं। औद्योगिकीकरण में वृद्धि के कारण कारखाने से विषाक्त गैस उत्सर्जन नदियों में छोड़ा जा रहा है। इस सब का परिणाम पर्यावरण पर होकर प्रदूषण बढ़ रहा है। कभी सुखा तो कभी बाढ़, महापुर, त्सुनामी, तापमान में चढ़ उतार, बारिश का कम ज्यादा होना, चक्रवात आदि। जल प्रदूषण, वायु प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण जैसी समस्याओं के कारण वैश्विक स्वास्थ्य खतरे में आ रहा है। हम जिस पर्यावरण के घटक है। वह प्रदूषित हो जाए तो संपूर्ण जीवित सृष्टि खतरे में आ जाएगी। उसके लिए प्रदूषण ना बढ़े इसके लिए समाधान खोजना बहुत महत्वपूर्ण है। पेड़ तोड़ना रोकना होगा और नए पेड़ ज्यादा से ज्यादा लगवाने होंगे। इसके लिए समाज में जन जागरूकता करना महत्वपूर्ण है। पर्यावरण में धूल कम करने के लिए प्रयास करना चाहिए। निर्माताओं को औद्योगिकरण से होने वाले प्रदूषण से बचाने के लिए निर्देशों का पालन करना चाहिए। पानी की कमी को दूर करने के लिए भूजल का स्तर बढ़ाना आवश्यक है। ईंधन की खपत सीमित होनी चाहिए। आदि चीजों का उपयोग करने से बड़ी मात्रा में प्रदूषण रोका जा सकता है और प्रकृति के संतुलन के साथ पर्यावरण को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। हमारे एनजीओ के माध्यम से पर्यावरण की रक्षा के काम किए जाएंगे। एनजीओ ने उनमें से कुछ चीजों को लागू करने का फैसला किया है हम आशा करते हैं कि हमारा एनजीओ का काम प्रगति पर रहेगा। धन्यवाद, ।।जय हिंद जय भारत।।


NGO Jeevan Welfare Foundation
Nagpur
Mr. Sachin Raut

(Director)